मोक्षदा एकादशी : गीता पाठ व हरिनाम जप अवश्य करें
मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोक्षदा एकादशी के नाम से जाना जाता है। इसी दिन गीता जयंती भी रहती है। इस वर्ष 2025 में मोक्षदा एकादशी का व्रत 1 दिसंबर, सोमवार को रखा जाएगा। मोक्षदा एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और इसे अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है, क्योंकि यह व्रत करने वाले को और उसके पितरों को मोक्ष प्रदान करता है। सूर्योदय से पहले ब्रह्म मुहूर्त में उठें। जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। सादे अथवा पीले रंग के वस्त्र धारण करें। भगवान विष्णु और लक्ष्मी का विशेष पूजन करें। पीले फूल, पीला चंदन, फल और पीली मिठाई अर्पित करें। भोग में तुलसी दल (पत्ते) अवश्य शामिल करें, क्योंकि तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते न तोड़ें।
पत्तों को एक दिन पहले दशमी को ही तोड़कर रख लेना चाहिए। एकादशी पर तुलसी को जल भी नहीं चढ़ाना चाहिए, क्योंकि माना जाता है कि इस दिन माता तुलसी भगवान विष्णु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। पूरे दिन ú नमो भगवते वासुदेवाय नम: मंत्र का अधिक से अधिक जप करते रहें (कम से कम 108 बार)। मोक्षदा एकादशी के दिन श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। आपको व्रत कथा के साथ-साथ गीता का कम से कम एक अध्याय अवश्य पढऩा चाहिए या सुनना चाहिए। सामर्थ्य अनुसार निर्जला व्रत (बिना जल के) रखें, या फलाहार (फल और दूध/जल) कर सकते हैं। अन्न, चावल और दाल का सेवन पूरी तरह वर्जित है, ब्रह्मचर्य का पालन करें। मन, वाणी और कर्म में सात्त्विकता बनाए रखें। किसी की निंदा न करें। रात्रि में भजन-कीर्तन, प्रभु स्मरण और ध्यान करें। दूसरे दिन यानि द्वादशी को पारण से पहले अपनी क्षमतानुसार ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को भोजन कराएं, वस्त्र या अन्न का दान करें।

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