जप-तप व आराधना का बेहतरीन समय है नवरात्रा, आत्मिक व मानसिक संयम से करें व्रत-उपासना
तप-जप व आराधना का बेहतरीन समय है शारदीय नवरात्रा। सोमवार से प्रथम तिथि के साथ नवरात्रा शुरू होंगे और 30 सितम्बर को दुर्गाष्टमी मनाई जाएगी। इस बार तृतीया तिथि दो बार होने के कारण नवरात्रा 10 दिन चलेंगे। ज्योतिर्विद पं. गिरधारी सूरा पुरोहित ने बताया कि दुर्गादेवी की आराधना-अनुष्ठान में महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती का पूजन तथा श्रीदुर्गासप्तशती का पाठ नवाह्न परायण पाठ, शतचंडी यज्ञ और भैरव, गणेश पाठ नौ दिनों तक प्रतिदिन करना चाहिए। किसी कारणवश यह संभव नहीं हो तो देवी के नवार्ण मंत्र ú ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै का जाप करें। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व का समापन पूर्णाहुति हवन एवं कन्या भोज कराकर किया जाना चाहिए।
घट स्थापना मुहूर्त
सुबह 6:30 से सुबह 8 बजे तक अमृत वेला
सुबह 9:30 से सुबह 11 बजे तक शुभ वेला
दोपहर 12:27 से दोपहर 1:10 तक अभिजीत वेला
दोपहर 3:30 से शाम 6:30 लाभ अमृत चौघडि़ए में
इन बातों का रखें ध्यान
हर व्रतधारी को हमेशा दया, क्षमा तथा उदारता का भाव रखने का संकल्प लेना चाहिए। नवरात्रि में नौ दिनों तक अखंड ज्योत जलाकर रखना चाहिए। नवरात्रि के दिनों में दुर्गा मंदिर में माता रानी को चुनरी, लाल रंगी की चूडिय़ां और नारियल अर्पित करना चाहिए। छोटी कन्याओं को भोजन करवा कर, उनकी पूजा करके उन्हें दक्षिणा देनी चाहिए। शारीरिक और मानसिक संयम रखना भी बहुत जरूरी होता है। नवरात्रि में विशेषरूप से किसी कन्या, माता या किसी भी अन्य महिला का दिल नहीं दुखाना चाहिए। यदि नवरात्रि कलश घटस्थापना करने के बाद परिवार में सूतक हो जाए, तो कोई दोष नहीं होता, लेकिन यदि पहले हो जाएं, तो पूजन के कार्य न करें। नवरात्रि में प्याज-लहसुन अथवा तामसिक व किसी प्रकार के नशे का सेवन नहीं करना चाहिए। नवरात्रि में बाल और नाखून काटने की सख्त मनाई है, अत: ये काम नहीं करना चाहिए। नवरात्रि के दिनों में ब्रह्मचर्य का पालन करना आवश्यक है, इस समयावधि में स्त्री प्रसंग तो बिलकुल भी नहीं करना चाहिए। ध्यान रखें कि माता के नैवेद्य में नमक, मिर्च और तेल का प्रयोग नहीं किया जाता है। अखंड दीपक और घट स्थापित करने के बाद घर को सुना नहीं छोडऩा चाहिए।
नौ दिन लगाएं नौ भोग
प्रथम नवरात्रि के दिन मां के चरणों में गाय का शुद्ध घी अर्पित करने से आरोग्य का आशीर्वाद मिलता है तथा दूसरे नवरात्रि के दिन मां को शक्कर का भोग लगाएं व घर में सभी सदस्यों को दें, इससे आयु वृद्धि होती है। तीसरे नवरात्रि के दिन दूध अथवा दूध से बनी मिठाई खीर का भोग मां दुर्गा को लगाकर ब्राह्मण को दानस्वरूप दें, इससे दुखों की मुक्ति होकर परम आनंद की प्राप्ति होती है। चौथी नवरात्रि के दिन मां दुर्गा को मालपुए का भोग लगाएं और मंदिर के ब्राह्मण को दान दें। इससे बुद्धि का विकास होने के साथ-साथ निर्णय शक्ति बढ़ती है। पांचवें नवरात्रि के दिन मां को केले का नैवैद्य चढ़ाने से शरीर स्वस्थ बना रहता है। छठवीं नवरात्रि के दिन मां दुर्गा को शहद का भोग लगाएं, जिससे आकर्षण शक्ति में वृद्धि होती है। सातवें नवरात्रि के दिन मां को गुड़ का नैवेद्य चढ़ाकर उसे ब्राह्मण को दान करने से शोक से मुक्ति मिलती है, तथा आकस्मिक आने वाले संकटों से रक्षा भी होती है। नवरात्रि के आठवें दिन माता रानी को नारियल का भोग लगाएं और इसका दान कर दें, इससे संतान संबंधी परेशानियों से छुटकारा मिलता है। नवरात्रि की नवमी के दिन तिल का भोग लगाकर ब्राह्मण को दान दें। इससे मृत्यु भय से राहत तथा अनहोनी घटनाओं से बचाव होता है।

श्री मक्खन जोशी की पुण्यतिथि पर चलेगा ‘हमारी संस्कृति, हमारी विरासत’ अभियान, बुधवार को होगी शुरुआत
आस्था और समर्पण का केन्द्र बना कैंसर पीडि़तों का आश्रम : पवन धूपड़
पर्ल हाइट्स अपार्टमेंट ऑनर्स एसोसिएशन के चुनाव सम्पन्न, अनिल कोठारी बने अध्यक्ष
स्व. रामरतन कोचर 29वां साहित्यकार पुरस्कार के लिए यूपी के आचार्य देवेन्द्र कुमार देव का हुआ चयन
प्रयागराज माघ मेले में महात्यागी नगर खालसा बीकानेर वाले का हुआ शुभारम्भ, पूज्य गुरु महाराज श्री रामदास जी महाराज ने किया ध्वज पूजन
सर्दी में राहत के प्रयास : महावीर रांका ने जरुरतमंदों को 500 जोड़ी जूते वितरित किए
शशिकला राठौड़ ने कांग्रेस महिला कार्यकारिणी की घोषणा की, वरिष्ठ नेताओं का हुआ अभिनंदन