पितरों की विदाई का दिन है सर्वपितृ अमावस्या तर्पण, पंचबली व पीपल पूजन से पितृ होंगे तृप्त
रविवार को सर्वपित्त अमावस्या है। इस दिन समस्त पितरों के नाम पर तर्पण करना चाहिए। जिनके परिवार में कोई मातृशक्ति सती हुई हो तो अमावस्या के दिन सती के निमित्त श्राद्ध करना चाहिए। सर्वपितृ अमावस्या का दिन पितरों को विदा करने का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है। इस दिन पितरों के लिए श्राद्ध, तर्पण और दान-पुण्य करने से वे प्रसन्न होते हैं और अपनी पीढिय़ों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। पंडित गिरधारी सूरा ने पितृदोष के प्रभाव को कम करने के लिए कुछ घरेलु व सरल उपाय को बताए हैं जिनसे जातक के जीवन की हर मुश्किल दूर होगी और वह कामयाबी को हासिल करने में सक्षम बन सकेगा।
- अमावस्या के दिन घर में पितरो का विधिवत पूजन अर्चन कर तर्पण व हवन करना चाहिए और यथाशक्ति ब्राह्मणों को भोजन कराकर वस्त्र व दक्षिणा देकर आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए।
- पीपल के वृक्ष पर शाम को तेल का दीपक करें।
- पितरों के निमित वस्तु (वस्त्र व अन्न) का दान करना चाहिए।
- पितृ स्तोत्र, नाग स्तोत्र, नवचंडी पाठ, गीता पाठ, महामृत्युंजय व श्रीमदभागवत का पाठ (जो आपसे नियमित हो सके कोई एक पाठ) करना चाहिए।
- किसी गरीब व्यक्ति की सहायता करने से भी पितरों को मुक्ति मिलती है।
- पितरों के निमित गरीब विद्यार्थियों की सहायता करने व दिवंगत परिजनों के निमित पानी पीने का स्थान (प्याऊ) अस्पताल, मन्दिर व धर्मशाला का निर्माण कराना चाहिए।
- गाय को गुड़ व अपने पितरों को खीर, जलेबी का भोग लगाकर ब्राह्मणों को भोजन कराएं।
- घर में जहां पानी का स्थान हो वहां सायं के समय दीपक करना चाहिए।
- घर को गंगाजल, गोमूत्र व गोबर से पोछा लगाना चाहिए, सारे दोष दूर होते हैं।
- कोई भी उपाय करने से पहले अपने गुरूजनों, माता-पिता व कुल देवी-देवताओं का आशीर्वाद अवश्य लें।
सरल और प्रभावी तरीका है पंचबली कर्म
पंचबली कर्म पितरों को सीधे भोजन पहुंचाने का एक सरल और प्रभावी तरीका है। सर्वपितृ अमावस्या के दिन पंचबली कर्म यानी पाँच जीवों – गाय, कुत्ता, कौआ, देवता और चींटियों के लिए भोजन निकालें। यह भोजन पितरों के सम्मान में अर्पित किया जाता है। खीर पितरों का पसंदीदा व्यंजन माना जाता है। सर्वपितृ अमावस्या के दिन, विशेष रूप से ग्रहण के प्रभाव को शांत करने के लिए, चावल और दूध से बनी खीर का भोग पितरों को लगाएं। इस खीर को किसी पवित्र स्थान, जैसे पीपल के पेड़ के नीचे या किसी ब्राह्मण को अर्पित करें। यदि संभव हो तो, इसे छत पर कौवों के लिए रखें।
अगर आपको धन से संबंधित समस्याएं बनी हुई है, तो इसके लिए आप सर्वपितृ अमावस्या के दिन एक पीले रंग का धागा या फिर लाल कलावा लेकर उसमें 108 गांठ लगाएं। इसके बाद इस धागे को तुलसी के गमले में बांध दें। इसके साथ ही आप सर्वपितृ अमावस्या की शाम को तुलसी के पास एक घी का दीपक जलाकर 7 बार परिक्रमा भी कर सकते हैं। ऐसा करने से साधक को भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा की प्राप्ति होती है।

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