चतुर्थी को विराजित होंगे गणपति, अनंत चतुर्दशी पर होगा विसर्जन
दस दिन विभिन्न द्रव्यों से करें अभिषेक : मोदक, चूरमे का लगाएं भोग, मनोरथ होंगे पूर्ण, खुलेंगे सुख-समृद्धि के द्वार
बीकानेर। सनातन धर्म के उपास्य देवो में श्री गणपति भगवान का स्थान सर्वोपरि है वे विघ्नों को हरने वाले और अग्रपूज्य हैं। गणेश चतुर्थी इस बार 27 अगस्त 2025, बुधवार को है और अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान गणेशजी की प्रतिमा का विसर्जन होता है। ज्योतिर्विद पं. गिरधारी सूरा पुरोहित ने बताया कि यह मान्यता है कि भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को भगवान गणेशजी का जन्म हुआ था। इस दिन घरों में, व्यापार में, बड़ी जगहों पर और हर घर के मुख्य दरवाजों पर गणेशजी का पूजन होता है। गणेशजी की उपासना करने से घर में संपन्नता, समृद्धि, सौभाग्य और धन का समावेश होता है। पंडित गिरधारी सूरा ने बताया कि सभी पार्थिव गणेशजी की प्रतिमा को लाकर पूजन करते हंै लेकिन शास्त्रों में कई प्रकार से बने गणपति का उल्लेख मिलता है जिसमें गुड़ की प्रतिमा, हरिद्रा की प्रतिमा, गोधूमान्न और अन्य कुछ लोग गणेश चतुर्थी के अगले दिन गणेश की प्रतिमा का विसर्जन करते हैं और कुछ गणेश चतुर्थी के बाद 3, 5, 7, 10वें दिन और 11वें दिन पर गणपति विसर्जन करते हंै।
मूर्ति को कपड़े से ढक कर लाएं…
पं. सूरा ने बताया कि जो श्रद्धालु गणेशजी की मूर्ति को घर में या कहीं से भी लेकर आते हैं तो सबसे पहले मूर्ति को कपड़े से ढककर लाना चाहिए। गणपति पूजन से पहले सूर्य भगवान का पूजन करना चाहिए। हमने देखा है कि सनातन धर्म किसी भी देवी-देवताओं का पूजन हो तो सर्वप्रथम भगवान गणपति का पूजन करते है, लेकिन पूजन में भगवान गणेशजी अगर प्रधान देवता हो तो उनसे पहले सूर्य भगवान का पूजन करना श्रेष्ठ माना जाता है। विद्वान ब्राह्मण के द्वारा विधि विधान से भगवान गणपति की प्राण प्रतिष्ठा कर, स्नान व पृथक-पृथक द्रव्यों से अभिषेक आदि कर वस्त्र पहनाएं। षोड्षोपचार पूजन करके साथ में पात्र पूजन आवरण सहित अंगों का पूजन अर्चन करें। नैवेद्य में विशेष रूप से मोदक, चूरमा, कवीठ, लाजा का भोग लगाएं साथ में पान, सुपारी, फल, दक्षिणा लगाकर आरती और पुष्पांजलि करें।
दस दिनों तक नैवेद्य चढ़ाने का महत्व
गणेश उत्सव में 10 दिनों तक भगवान गणेश को प्रसाद या नैवेद्य चढ़ाना सिर्फ एक परंपरा नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व छिपा है। इस अवधि के दौरान गणपति पृथ्वी पर अपने भक्तों के घरों में निवास करते हैं। जिस तरह एक मेहमान के आने पर हम हर दिन उसका सत्कार करते हैं, उसी प्रकार हम अपने प्रिय गणेश जी का भी दस दिनों तक विशेष आतिथ्य सत्कार करते हैं। दस दिनों तक भगवान गणेश को उनके प्रिय पकवानों जैसे मोदक, लड्डू, पूरन पोली का भोग लगाने से वे प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

पंचांग के अनुसार गणेश स्थापना पूजन का श्रेष्ठ समय शुभ चौघडिय़ा व वृश्चिक लग्न सहित मध्याह्न माना गया है जिसका समय दोपहर 12:13 से दोपहर 2:39 तक गणेश स्थापना कर सकते हैं।
इन उपायों से मिटेंगे कष्ट
आर्थिक संकट का भार हो तो ऋणहर्ता गणपति अनुष्ठान करें। संतान प्राप्ति के लिए सन्तान गणपति स्तोत्रम का पाठ करें। विवाह दोष दूर करने के लिए त्रैलोकयमोहन गणेश का अनुष्ठान करें। पंडित गिरधारी सूरा ने बताया कि जिनकी कुंडली में कोई प्रकार का दोष, व्यापार में बाधा या आर्थिक समस्या हो तो भगवान गणपति को इन उपायों से करें प्रसन्न- सर्वमनोकामना हेतु पार्थिव गणपति का पूजन व अभिषेक करें। चारों पुरुषार्थ की प्राप्ति के लिए गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करें। गणपति सहस्त्रार्चन करने से भगवान गणेशजी कृपा पूर्ण रूप से बनी रहती है। समस्त प्रकार के संकट दूर करने के लिए संकटनाशन स्तोत्रं और भालचंद्र का पाठ करें। शोक निवारण व रोगोपद्रव को शांत करने के लिए मयूरेश स्तोत्रं का पाठ और साथ मे मधुत्रय व लाजा से हवन करें।
गलती से भी न देखें चंद्रमा…
पुराणों के अनुसार गणेश चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन या चंद्रमा को देखने से चंद्र दोष लगता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन चंद्र के दर्शन करने से झूठा दोष अथवा मिथ्या कलंक लगता है। चतुर्थी तिथि के प्रारम्भ और अन्त समय के आधार पर चन्द्र-दर्शन लगातार दो दिनों के लिए वर्जित हो सकता है। अगर भूल से गणेश चतुर्थी के दिन चन्द्रमा के दर्शन हो जाएं तो मिथ्या दोष से बचाव के लिए निम्नलिखित मन्त्र का जाप करना चाहिए-
सिंह: प्रसेनमवधीत्सिंहो जाम्बवता हत:।
सुकुमारक मारोदीस्तव ह्येष स्यमन्तक:॥
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