कल करें दान-पुण्य, पितरों को मिलेगी तृप्ति
बीकानेर। 8 अप्रेल को सोमवती अमावस्या है। यह अमावस्या विशेष है क्योंकि उदय काल से ही अमावस्या का प्रभाव सूर्य सिद्धांत की गणना से आरंभ होगा। अमावस्या तिथि पर दरिद्रता के निवारण के लिए पितरों की पूजा और रात्रि में भगवती की साधना विशेष मानी गई है। पं. गिरधारी सूरा ने बताया कि चैत्र माह में आने वाली सोमवती अमावस्या का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा-व्रत करने का विधान है। साथ ही स्नान और दान का भी विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार सोमवती अमावस्या पर पवित्र नदी में स्नान या फिर घर में पानी में गंगाजल मिलाकर नहाने और दान करने से साधक को पापों से छुटकारा मिलता है।

अमावस्या के दिन घर में पितरों का विधिवत पूजन अर्चन कर तर्पण व हवन करना चाहिए और यथाश्क्ति ब्राह्मणों को भोजन कराकर वस्त्र व दक्षिणा देकर आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए। पीपल के वृक्ष पर जल, पुष्प, दूध, गंगाजल, काले तिल चढायें व तेल का दीपक करें। पितरों के निमित वस्तु (वस्त्र व अन्न) का दान करना चाहिए। किसी गरीब व्यक्ति की सहायता करने से भी पितरों को मुक्ति मिलती है। पितरों के निमित्त गरीब विद्यार्थियों की सहायता करने व दिवंगत परिजनों के निमित पानी पीने का स्थान (प्याऊ) अस्पताल, मन्दिर व धर्मशाला का निर्माण कराना चाहिए। घर में जहां पानी का स्थान हो वहां सायं के समय दीपक करना चाहिए।

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