ग्रहों को अनुकूल बनाने और उन्नति प्रदान करने में रत्नों की महत्वपूर्ण भूमिका
दिन-समय-राशि व नक्षत्रों को ध्यान में रख कर खरीदें रत्न
ज्योतिष शास्त्र में नवग्रह बताए गए हैं। ये ग्रह समय-समय पर अपना स्थान परिवर्तन करते हैं। इसी कारण ये प्रत्येक जातक की कुंडली में शुभ और अशुभ स्थिति व योग का निर्माण करते हैं। बीकानेर के जाने-माने ज्योतिर्विद पं. गिरधारी पुरोहित सूरा ने बताया कि ग्रहों को अनुकूल बनाने और लाभ प्राप्त करने के लिए ज्योतिष की शाखा रत्नशास्त्र में कई रत्नों के बारे में बताया गया है। रत्न बहुत ही प्रभाव शाली माने जाते हैं। इन्हें धारण करने से न केवल व्यक्ति के जीवन से संबंधित ग्रह की अशुभता के कारण होने वाली परेशानियों से मुक्ति प्राप्त होती है बल्कि जीवन में कई सकारात्मक परिवर्तन भी आते हैं। व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है लेकिन रत्न धारण करने से पहले कुछ बातों को ध्यान में रखना बहुत ही जरुरी होता है।

यदि इन बातों और नियमों को ध्यान में न रखा जाए तो आपको रत्न का उचित लाभ नहीं मिल पाता है साथ ही फायदा होने के स्थान पर नुकसान भी हो सकता है। पं. गिरधारी पुरोहित सूरा ने बताया कि यदि आपका कोई ग्रह अशुभ फल प्रदान कर रहा है या फिर आप जीवन में तरक्की, सफलता की कामना से रत्न धारण करना चाहते हैं तो किसी ज्योतिष से सलाह लेकर ही धारण करें। हर रत्न हर राशि के जातक को अनुकूल प्रभाव नहीं दिखाता है। यदि आप अपनी राशि या ग्रह के अनुसार रत्न धारण नहीं करते हैं तो इससे आपको फायदे के स्थान पर प्रतिकूल प्रभाव भी देखने को मिल सकता है। वैसे रत्न धारण करने के लिए सुबह 6 से 8 बजे तक का समय उत्तम माना जाता है।

लेकिन यदि आपको कोई रत्न धारण करना है तो किसी माह के शुक्ल पक्ष में शुभ मुहूर्त में ही धारण करें। इसके साथ ही रत्न खरीदते समय भी शुभ मुहूर्त का ध्यान रखना चाहिए। प्रत्येक रत्न को पहनने के लिए दिन भी निर्धारित होते हैं। उसी के अनुसार रत्न धारण करना चाहिए। जैसे माणिक्य रत्न रविवार को, मोती रत्न सोमवार को, पुखराज रत्न गुरुवार को, मूंगा रत्न मंगलवार को, पन्ना रत्न बुधवार को, नीलम, गोमेद व लहसुनिया रत्न शनिवार के दिन धारण करना शुभ माना जाता है। पं. गिरधारी पुरोहित ने बताया कि जब कोई भी रत्न धारण किया जाता है। तो उसे किसी न किसी धातु में जड़वाकर अंगूठी या फिर लॉकेट के रुप में पहनते हैं। यदि रत्न का भरपूर लाभ लेना चाहते हैं तो उसे संबंधित धातु में ही जड़वाकर पहनना चाहिए। जैसे मोती को चांदी धातु में तो वहीं पुखराज को सोने में धारण करना शुभ रहता है।
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