राज्यश्री को जूनागढ़ मंदिर में दर्शन के लिया रोका, बिना दर्शन वापस लौटी
बीकानेर। बीकानेर के पूर्व राजघराने का प्रॉपर्टी विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय शूटर राज्यश्री कुमारी जूनागढ़ किले में मंदिर दर्शन करने पहुंची तो उन्हें मुख्य गेट पर ही रोक दिया गया। बताया जा रहा है कि मुख्य गेट पर तैनात प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड और कोटगेट थानाधिकारी विश्वजीत सिंह ने राज्यश्री कुमारी व विधि सलाहकार एडवोकेट कमलनारायण पुरोहित और अविनाश व्यास को प्रवेश की परमिशन देने से इनकार कर दिया। इसके बाद करीब डेढ़ से दो घंटे तक इंतजार करने के बाद राज्यश्री वापस अपने घर लौट गई। राज्यश्री का कहना है कि पूर्व महाराजा नरेंद्र सिंह की आज पुण्यतिथि है, इसलिए वे जूनागढ़ स्थित मंदिर में दर्शन करने आई थी, लेकिन उन्हें रोका गया। यह पूजा के अधिकार का हनन है। उन्हें कानून पर पूरा भरोसा है और उन्हें जस्टिस जरूर मिलेगा। बता दें कि राज्यश्री वर्तमान में भाजपा विधायक सिद्धि कुमारी की बुआ है और करणी सिंह ट्रस्ट की संचालक है।
फिलहाल रायसिंह ट्रस्ट के अधीन जूनागढ़ है। यहां प्राचीना नाम से एक म्यूजियम है, जिसका संचालन सिद्धि कुमारी करती हैं। दोनों के बीच लंबे समय से पूर्व राजपरिवार की प्रॉपर्टी को लेकर विवाद चल रहा है। राज्यश्री के निजी सचिव गोविंद सिंह ने बताया कि एडीजे कोर्ट तीन ने राज्यश्री कुमारी के एडमिनिस्ट्रेटर होने और प्रॉपर्टीज पर कब्जा व हिसाब-किताब का नियंत्रण होने के तथ्य को सही मानते हुए राज्यश्री के प्रार्थना पत्र को स्वीकार किया है। साथ ही चल अचल संपत्तियों के संचालन के योग्य माना है। इसी निर्णय के आधार पर राज्यश्री का स्टाफ जूनागढ़ पहुंचा था और उनके आने की सूचना पहले पहुंच गई। ऐसे में पुलिस ने राज्यश्री व उनके स्टाफ को अंदर जाने से रोक दिया था।
हालांकि राज्यश्री कुमारी का कहना है कि जूनागढ़ में उनके पुरखों की ओर से बनाए गए कई मंदिर है, जहां वसीयत के अनुसार आवाजाही पर किसी प्रकार की रोक नहीं हैं। वे इन्हीं मंदिरों में दर्शन करने पहुंची थी, लेकिन पुलिस ने उन्हें मुख्य गेट पर ही रोक दिया। राज्यश्री ने मीडिया से कहा- आज ही पूर्व महाराजा नरेंद्र सिंह की पुण्यतिथि है, लेकिन आज ही के दिन उनकी बहन को किले में बने मंदिर में प्रवेश करने से रोका जा रहा है, जो गलत है। राज्यश्री कुमारी ने अपनी भतीजी सिद्धि कुमारी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे सरकार और विधायकी के दबाव में मनमानी कर रही हैं। हालांकि सिद्धि कुमारी की ओर से अभी तक इस मामले में कोई बयान जारी नहीं किया गया है।

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