अगली जनवरी तक नौ राज्यों में चुनाव, पर हलचल सिर्फ़ राजस्थान में
ठण्ड बड़ी है। लोग देर तक बिस्तर से नहीं उठते और ट्रेनें पटरियों पर सोई पड़ी रहती हैं। ज़्यादातर ट्रेनें तीन से तेरह घंटे लेट चल रही हैं। सब कुछ तीन-तेरह है। ठण्ड वैसे रचनाओं का काल है। सृजनात्मक मौसम है। उत्तराखण्ड के जोशी मठ में मानवीय भूलों के कारण दुख-दर्द के नए आयाम गढ़े जा रहे हैं। सरकार लीपापोती में लगी हुई है।
राजस्थान कुछ अलग ही सृजन में लगा हुआ है। जनवरी का महीना है और जयपुर में लिट फ़ेस्ट होने जा रहा है। साहित्य का मेला लगेगा। हर साल की तरह। ऐन इसी वक्त जब जयपुर में गीतों के घाट सजेंगे और साहित्यकारों का जमघट लगेगा, तभी राजनीतिक अखाड़े भी सजने वाले हैं।
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