गीता के श्लोक जीवन की सही राह दिखाने का काम करते हैं, इसमें धर्म के साथ कर्म का मर्म समाहित : श्री श्यामसुंदरदास जी महाराज
हजारों बच्चों ने निकाली शोभायात्रा, गीता श्लोक का किया वाचन, पुष्पवर्षा से हुआ स्वागत
बीकानेर। मुरली मनोहर धोरे पर सोमवार को गीता जयंती महोत्सव मनाया गया। श्री श्यामसुंदरदास जी महाराज ने बताया कि महोत्सव का शुभारम्भ तेरापंथ भवन से शोभायात्रा के रूप में हुआ। लगभग 4 हजार विद्यार्थियों ने एक साथ तेरापंथ भवन से मुरलीमनोहर धोरे तक शोभा यात्रा निकाली। करीब तीन किमी की इस शोभायात्रा में विद्यार्थियों ने श्रीमद्भागवत गीत के श्लोक वाचन करते दिखे और लोगों ने पुष्पवर्षा कर विद्यार्थियों का स्वागत किया। शोभायात्रा में चार रथ थे जिनमें एक रथ तत्व विवेजनी, एक रथ साधक संजीवनी, एक रथ भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन और एक रथ नारायण का था। इसमें नवलरामजी आदि अनेक संतों ने भाग लिया।

यह शोभायात्रा मुरलीमनोहर मैदान पर सम्पन्न हुई। इसके पश्चात् मुरलीमनोहर धोरा में सामूहिक गीता पाठ के आयोजन हुए और संत-महात्माओं ने व्याख्यान दिए। पद्ज्ञान, झांकियों पर पुष्पवर्षा की गई। श्री श्यामसुंदरदास जी महाराज ने कहा कि गीता श्रवण से मोह नष्ट हो जाता है और स्मृति जागृत हो जाती है। गीता के श्लोक लोगों को जीवन की सही राह दिखाने का काम करते हैं. इसमें धर्म के साथ कर्म का मर्म समाहित है। सही मायने में कहा जाए तो यह कर्म, भक्ति और ज्ञान का संगम है, जिसमें डुबकी लगाने वाले व्यक्ति को जीवन में जरूर सफलता मिलती है। भगवान श्रीकृष्ण के द्वारा कहे गये गीता के अनमोल वचन व्यक्ति को कठिन समय में जीवन की सही राह दिखाने का काम करते हैं।

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