ग्रामीण क्षेत्र में बिजली की समस्याओं के खिलाफ देहात कांग्रेस ने खोला मोर्चा, बिशनाराम सियाग ने दस दिन का दिया अल्टीमेटम
बीकानेर। जिला कांग्रेस कमेटी देहात अध्यक्ष बिशनाराम सियाग के नेतृत्व में सुरपुरा, पांचू, बरसिंहसर, शेरेरा, केसरदेसर के ग्रामीणों सहित कई गांवों के प्रतिनिधि मण्डल ने विभिन्न बिजली सम्बन्धित समस्याओं को लेकर जोधपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के अधीक्षण अभियंता को ज्ञापन सौंपकर समस्याओं के समाधान करवाने पर वार्ता की। सुरपुरा के किसानों ने भामटसर जीएसएस से सुरपुरा जीएसएस को अलग से नया ट्रांसफार्मर लगाकर विद्युत लाइन जोडऩे तथा सुरपुरा जीएसएस में जर्जर इन्सुलेटर पोल व डिस को बदलने, ग्राम पंचायत पांचू में वंचित ढाणियों में विद्युत कनेक्शन करवाने, बरसिंहसर में कृषि कनेक्शन अधिक होने से विद्युत लोड बढ़ गया है, जिस कारण विद्युत आपूर्ति प्रभावित हो रही है अत: अतिरिक्त ट्रांसफार्मर लगाने, शेरेरा व केसरदेसर में स्थानीय ग्रामीण विद्युत ट्रिपिंग समस्या से परेशान हैं।
इस समस्या के समाधान करवाने सहित बीकानेर जिले के ग्रामीण अंचल में काफी गांवों में विद्युत आपूर्ति सम्बन्धित अनेक समस्याओं को लेकर देहात अध्यक्ष बिशनाराम सियाग सहित प्रतिनिधिमण्डल ने जेवीवीएनएल के अधीक्षण अभियंता को ज्ञापन सौंपकर लम्बित समस्याओं के त्वरित समाधान करने के लिए कहा। सियाग ने चेतावनी दी कि आगामी दस दिवस में ज्ञापन में वर्णित समस्याओं का कार्य पूर्ण करवाएं अन्यथा मजबूरन पीडि़त ग्रामीणों को साथ लेकर आन्दोलन किया जाएगा।
जिला संगठन महासचिव मार्शल प्रहलाद सिंह ने बताया कि ज्ञापन सौंपने और वार्ता करने वाले प्रतिनिधिमंडल में सुरपुरा से मदनलाल भांभू, मूलाराम भांभू, दुलाराम खाती, पांचू से सोहनलाल मेघवाल व अशोक सियाग, शेरेरा से सरपंच भागीरथ गोदारा, केसरदेसर से श्रीकिशन गोदारा, बरसिंहसर से पप्पू गोदारा आदि के साथ पूनमचन्द भांभु, बृजलाल खाती, आदुराम भांभू, पूनमचन्द प्रजापत, श्रवण जाट, मांगीलाल जाट, ओमप्रकाश जाट, पुरखाराम महिया, गणेशाराम माहिया, पदमा राम पचार, चेनाराम गर्ग, चोखाराम माहिया, संजय रलिया, सोहन नाई सहित अनेक किसान मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री की चुनौती समझ से परे : सियाग
अधीक्षण अभियंता से वार्ता के बाद मीडिया से रूबरू होते हुए सियाग ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अभी हाल में ही एक कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को खुले मंच पर बिजली उत्पादन और कनेक्शन के आंकड़ों की तुलना करने की चुनौती दी थी। आम जनता और किसान पर्याप्त बिजली आपूर्ति के अभाव में और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कनेक्शन के लिए तरस रहे हैं, बिजली की आपूर्ति नहीं होने से किसानों की फसलें बर्बाद हो गई, किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं तो मुख्यमंत्री खुले मंच पर क्या बहस करना चाहते हैं? यह समझ से परे है।

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