प्रदेश में आई फ्लू का कहर, डॉक्टरों की छुट्टी पर भी लगी रोक
जयपुर। राजस्थान में इस साल आई फ्लू का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। अस्पतालों में मरीजों की कतार आउटडोर खुलने से पहले ही लगनी प्रारंभ हो जाती हैं। स्वास्थ्य केंद्रों पर हर दिन आंखों में लालीपन,चुभन और खुजली की समस्या लिए लोग पहुंच रहे हैं। जिसके चलते कई अस्पतालों में दवाइयों की भी कमी हो गई है। आईफ्लू के बढ़ते संक्रमण के बीच एसएमएस, जयपुरिया समेत अन्य सरकारी अस्पताल, डिस्पेंसरियों के अलावा बाजार में इस संक्रमण से बचाव के लिए काम आने वाली दवाइयों का टोटा हो गया है।

इन अस्पतालों में डॉक्टर जिन दवाइयों का परामर्श दे रहे हैं, वे ही यहां नहीं मिल रही हैं। मजबूरन मरीजों को अस्पताल से बाहर दूसरी वैकल्पिक दवाइयां लेनी पड़ रही हैं। सबसे ज्यादा परेशानी आईड्रोप को लेकर हो रही है।
दरअसल, इन दिनों घर-घर में आईफ्लू से ग्रस्त मरीज मिल रहे हैं। ये हर उम्र के लोगों को चपेट में ले रहा है। अस्पतालों की ओपीडी में 30-40 फीसदी मरीज आईफ्लू से पीडि़त आ रहे हैं। एसएमएस अस्पताल के नेत्ररोग विशेषज्ञों का कहना है कि आईफ्लू के रोजाना 150 से 200 मरीज पहुंच रहे हैं इसलिए ड्रोप की कमी आ गई है। डिमांड भेज दी है। जल्दी समाधान हो जाएगा।
वहीं आई फ्लू के संक्रमण को देखते हुए बीकानेर के पीबीएम अस्पताल तथा जिला अस्पताल (सेटेलाइट) के नेत्र रोग विभाग के सभी चिकित्सकों के अवकाश पर रोक लगा दी गई है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गुंजन सोनी ने नेत्र रोग विभाग में मरीजों की भीड़ देखी, तो उन्होंने तत्काल नेत्र रोग चिकित्सकों के अवकाश पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए। इस समय नेत्र रोग विभाग में प्रतिदिन औसतन 1100 मरीजों का पंजीकरण हो रहा है। यहीं स्थिति जिला अस्पताल में भी देखने को मिल रही है।
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