गौचर भूमि के भू उपयोग पर सरकार व बीडीए पुनर्विचार करे- बिशनाराम सियाग
बीकानेर। जिला कांग्रेस कमेटी के देहात अध्यक्ष बिशनाराम सियाग ने बीकानेर विकास प्राधिकरण की ओर से मास्टर डवलपमेंट प्लान-2043 का जारी किया गया प्रारूप पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि शहर के आस पास की गौचर भूमि जो कि स्थानीय नागरिकों की आस्था और पर्यावरण संरक्षण का केन्द्र मानी जाती है को लेकर जो प्लान बनाया गया है वह पूर्ण रूप से आपत्तिजनक है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा राज्य में पारंपरिक रूप से संरक्षित गौचर व ओरण भूमि को वन भूमि का दर्जा देने संबंधी ऐतिहासिक निर्णय दिया था। सियाग ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि पारंपरिक ग्रामीण आस्थाओं और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा की दिशा में भी एक बड़ा प्रयास है। जिस पर सरकार व प्रशासन को अमल करते हुए गौचर भूमि को संरक्षित करना चाहिए। गौचर लोगों की आस्था का केन्द्र होने के साथ ही चारागाह की जमीन गौवंश, अन्य पशु पक्षियों का संरक्षण घर माना जाता है और पशु पक्षियों के इस घर को संरक्षित करने की बजाय बीडीए द्वारा इसे उजाड़ कर अन्य प्रयोजनों में भूउपयोग करना लोगों की जन भावनाओं पर सीधा प्रहार तो है ही पर्यावरण संरक्षण को भी खतरे में डालने का कृत्य है। सियाग ने कहा कि यदि सरकार व बीडीए ने इस पर पुनर्विचार नहीं किया तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

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