दीक्षांत समारोह : 120 विद्यार्थी हुए दीक्षित संत-महात्माओं ने दिया आशीर्वचन
भगवान शालिग्राम का पंचामृत से किया अभिषेक, वैदिक मंत्रों से गूंजा रघुनाथ मंदिर
बीकानेर। त्रिस्कन्ध ज्योर्तिगणित के प्रकाण्ड विद्वान पं. बाबूलालजी शास्त्री की 87वीं जयंती के उपलक्ष में ग्रीष्मकालीन सत्र 18 मई 2025 से 19 जून 2025 तक दिव्य विष्णु सहस्त्रनाम एवं गोपाल सहस्त्रनाम पाठ का अभ्यास व ज्योतिष शिक्षा का ज्ञान प्रदान किया गया। पं. बाबूलाल शास्त्री ज्योतिष बोध संस्थान द्वारा आयोजित इस शिविर के संयोजक ज्योतिषाचार्य पं. राजेन्द्र किराड़ू ने बताया कि सनातन संस्कृति के संरक्षण, संवद्र्धन एवं वैदिक संस्कृति को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से हर वर्ष वैदिक व संस्कृति ज्ञान शिविर का आयोजन किया जाता है। किराड़ू गली स्थित रघुनाथजी मंदिर में इस वर्ष दिव्य विष्णु सहस्त्रनाम एवं गोपाल सहस्त्रनाम पाठ का अभ्यास व ज्योतिष शिक्षा का ज्ञान प्रदान किया गया। गुरुवार को शिविर का समापन दीक्षांत समारोह के रूप में मनाया गया।

दीक्षांत समारोह में महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के कुलगुरु आचार्य मनोज दीक्षित का मुख्य आतिथ्य रहा एवं रामझरोखा कैलाशधाम के अधिष्ठाता राष्ट्रीय संत श्री सरजूदासजी महाराज, मुरलीमनोहर धोरा के श्री श्यामसुंदरदासजी महाराज, पं. जुगलकिशोर ओझा (पुजारी बाबा) का सान्निध्य एवं गौसेवक देवकिशन चांडक देवश्री का विशिष्ट आतिथ्य रहा। कार्यक्रम में प्रशिक्षण दे रहे पं. प्रहलाद व्यास और विमल किराड़ू का अभिनंदन किया गया। दीक्षांत समारोह में 120 विद्यार्थियों ने शालिग्राम भगवान का पंचामृत से अभिषेक किया तथा विष्णु सहस्त्रनाम, गोपाल सहस्त्रनाम एवं पुरुष सुक्त के वाचन से रघुनाथ मंदिर को गुंजायमान किया। कार्यक्रम में इंटक नेता रमेश व्यास, समाजसेवी रूपकिशोर व्यास, समाजसेवी पूनम व्यास, श्रीलाल जोशी, रामचन्द्र व्यास, इंटक नेता हेमन्त किराड़ू, गोवर्धन किराड़ू, श्रीलाल किराड़ू, आशानंद किराड़ू, नारायणदत्त किराड़ू, कैलाश भादाणी, अशोक बिस्सा, शिवशंकर किराड़ू, मुरलीधर पुरोहित, देवकीनंदन, जुगलकिशोर भवानीशंकर व्यास, सेठी किराड़ू, हिमांशु किराड़ू, शिवम पुरोहित आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन ज्योतिप्रकाश रंगा व राजा सांखी द्वारा किया गया।
सनातन के प्रखर संरक्षक रहे पं. बाबूलाल शास्त्री
मुहुर्त विज्ञान के प्रखरविज्ञ साहित्य शास्त्री व्याकरणाचार्य, पंचांगकर्ता, यज्ञाचार्य, ज्योतिषाचार्य रहे पं. बाबूलाल शास्त्री ने अपनी पूरा जीवन वेद-पुराणों और सनातन व संस्कृति को समर्पित कर दिया। पं. बाबूलाल शास्त्री की विद्वता की साख न केवल राजस्थान बल्कि पूरे भारतवर्ष में रही। बताया जाता है कि प्रकांड पंडितों व विभिन्न शंकराचार्य से शास्त्रोक्त कर चुके पं. बाबूलाल शास्त्री ने इस ज्योतिष व यज्ञ अनुष्ठान के क्षेत्र में कई जनों को प्रशिक्षण देकर इस सनातन संस्कृति को संरक्षित रखा। गणेश पंचांग के निर्माता पं. बाबूलाल शास्त्री के ब्रह्मलोक होने के 22 वर्ष बाद भी उनके द्वारा किए गए कार्य आज भी सनातन के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं। पं. बाबूलाल शास्त्री के पुत्र पं. राजेन्द्र किराड़ू उनकी विरासत को आगे बढ़ाते हुए सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार हेतु सदैव अग्रणी रहते हैं। पं. शास्त्री ने संस्कृत शास्त्री की परीक्षा महाराजा संस्कृत विद्यालय जयपुर के प्रिंसिपल चंडीप्रसादजी दाधीच के सान्निध्य में की तथा ज्योतिषगणित, पंचांग आदि का विशेष ज्ञान बड़े भाई गुरु तुल्य पं. पूनमचंद किराड़ू से प्राप्त किया। शास्त्रीजी प्रखर पंडित होने के साथ-साथ अच्छे गीतकार भी थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में चुनाव, रम्मतों आदि के अनेक गीत बनाए। गणेश, दुर्गा, भैरव आदि देवताओं पर अनेक भजन लिखे। गौरव का विषय यह है कि उस दौर में बीकानेर का प्रत्येक धार्मिक अनुष्ठान किराड़ूजी के करकमलों से ही सम्पन्न होता था और दिग्गज नेताओं सहित मुख्यमंत्री भैरोसिंह शेखावत भी शास्त्रीजी से लगाव रखते थे।
8 से 51 वर्ष आयुवर्ग के विद्यार्थी हुए शामिल, बालिका वर्ग ने भी दिखाई रुचि
शिविर संयोजक ज्योतिषाचार्य पं. राजेन्द्र किराड़ू ने बताया कि वर्तमान में युवा पीढ़ी जो पाश्चात्य संस्कृति की ओर बढ़ रही है और मोबाइल जो बच्चों पर हावी होता जा रहा है उससे बचाव के लिए प्रतिवर्ष वैदिक शिविर एवं संस्कृति ज्ञान शिविर का आयोजन किया जाता है। गत पांच वर्षों से शिविर को वृहद रूप प्रदान करते हुए विद्यार्थियों की संख्या व संसाधनों की व्यवस्थाओं को बढ़ाया गया है। इस बार शिविर में 13 बालिकाओं व चार महिलाओं ने प्रशिक्षण लिया। खास बात यह है कि शिविर में कम से कम 8 वर्ष का तथा अधिकतम 51 वर्षीय आयुवर्ग के विद्यार्थी ने भी एक साथ प्रशिक्षण लिया।
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